Contemporary Thoughts

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मच्छर बोला आदमी से

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बरसात के मौसम में,

मच्छर ने अपना मुँह खोला,

और आदमी से इस तरह बोला —

.

मै तेरा खून पी जाऊँगा,

तेरे कान में बेसुरा संगीत बजाऊँगा,

डेंगू, मलेरिया से तुझे डराऊँगा,

चैन की नींद से तुझे जगाऊँगा,

तेरे घर में भी अपना कुनबा बढ़ाऊँगा,

मौका मिलते ही तुझे काट खाऊँगा,

.

आदमी ने मच्छर के बोल को सहा,

और फिर मच्छर से कहा —–

.

मेरा खून तो पहले ही भ्रष्टाचार ने पिया,

महंगाई  ने मेरा बैंड बजा दिया,

आतंकवाद के भय ने जीना मुश्किल किया,

चिन्ता और तनाव ने नींद को लूट लिया |

.

अब तू भी आ जा मुझे और दुखी करने को,

महंगाई, भ्रष्टाचार और आतंकवाद का साथी बनने को,

अपने डंक के जहर से मुझे सताने को,

बीमारियों का उपहार देकर मुझे रुलाने को,

.

मेरा खून पीकर बेशक तू अपना पेट भर,

पर बीमारियों को न मुझे  ट्रांसफर कर,

धोखे और स्वार्थ की ऐसी नीति से डर,

वरना रुक सकता है तेरा भी सफर,

न मुझे बीमारियों से डरा, न खुद भाग इधर-उधर,

मुझे भी चैन से जीने दे, खुद भी देख ले जीकर |



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yatindranathchaturvedi के द्वारा
December 19, 2013

अद्भुत, साभार

yamunapathak के द्वारा
December 18, 2013

बहुत खूब व्यंग है पुनीता जी. साभार

jlsingh के द्वारा
December 15, 2013

बहुत सुन्दर पुनीता जी, मेरा खून पीकर बेशक तू अपना पेट भर, पर बीमारियों को न मुझे ट्रांसफर कर, धोखे और स्वार्थ की ऐसी नीति से डर, वरना रुक सकता है तेरा भी सफर, न मुझे बीमारियों से डरा, न खुद भाग इधर-उधर, मुझे भी चैन से जीने दे, खुद भी देख ले जीकर |

December 15, 2013

सही व् सटीक अभिव्यक्ति .


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