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जीवन के दो हैं किनारे

Posted On: 27 Jul, 2013 Others,कविता में

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जन्म और मृत्यु, जीवन के दो हैं किनारे,
जीवन की नैया चलती है साँसों के सहारे ।

.
जीवन का हर पल है कीमती,
मृत्यु जीवन के चारों ओर घूमती,
जीवन की यात्रा धीरे धीरे आगे बढ़ती,
सुख दुःख संघर्षों को अपने में समेटती,
पुण्य पाप सुख दुःख सभी हैं हमारे,
जीवन की नैया चलती है साँसों के सहारे ।

.
बहुत मुश्किल से मिलता है मनुष्य जन्म,
अनेक जन्मों में घुमाते हैं अपने ही कर्म ।
मनुष्य जन्म अनमोल, नहीं इसमें कोई भरम,
मानवीय गुणों को पाना ही अपना है धर्म ।
धैर्य, संयम, सत्य, साहस जीवन के सितारे,
जीवन की नैया चलती है साँसों के सहारे ।

.
समय आगे बढ़ता रहता है निरन्तर,
बचपन, जवानी, बुढ़ापा आते हैं कालान्तर ।
खेल, पढाई, रोज़गार में समय बीते अधिकतर,
जन्म से मृत्यु तक आते हैं बहुत अन्तर ।
परोपकार और भलाई से जीवन को संवारे,
जीवन की नैया चलती है सांसों के सहारे ।

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भाग्य और पुरुषार्थ है जीवन की धुरी,
जीवन का कोई लक्ष्य बनाना है जरूरी,
पुण्य कार्यों से दूर रहने की न हो मजबूरी,
अच्छा इन्सान बने बिना जीवन की यात्रा है अधूरी,
अपने मनुष्य जन्म को व्यर्थ न गंवां रे ,
जीवन की नैया चलती है साँसों के सहारे

.



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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

aman kumar के द्वारा
August 8, 2013

भाग्य और पुरुषार्थ है जीवन की धुरी, जीवन का कोई लक्ष्य बनाना है जरूरी, पुण्य कार्यों से दूर रहने की न हो मजबूरी, आपकी लेखन शेली दमदार है !

    Punita Jain के द्वारा
    August 10, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद अमन जी |

Shweta के द्वारा
July 31, 2013

अति सुन्दर रचना ……………………

    Punita Jain के द्वारा
    August 10, 2013

    धन्यवाद श्वेता जी |

jlsingh के द्वारा
July 30, 2013

भाग्य और पुरुषार्थ है जीवन की धुरी, जीवन का कोई लक्ष्य बनाना है जरूरी, पुण्य कार्यों से दूर रहने की न हो मजबूरी, अच्छा इन्सान बने बिना जीवन की यात्रा है अधूरी, अपने मनुष्य जन्म को व्यर्थ न गंवां रे , जीवन की नैया चलती है साँसों के सहारे बेहतर और सार्थक सन्देश देती रचना !

    Punita Jain के द्वारा
    August 10, 2013

    हार्दिक धन्यवाद भाईसाहब जी |

Priyanshu Sharma के द्वारा
July 28, 2013

सुन्दर रचना |


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