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देश में हो रही है घोटालों की भरमार

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देश में हो रही है घोटालों की भरमार, :twisted:
जनता हो रही है भ्रष्ट व्यवस्था की शिकार |

               

घोटालों की वैसे तो है परम्परा पुरानी,
अब तो घोटालों ने रिकोर्ड तोड़ने की ठानी,
देश के खजाने को हो रही है भारी हानि, :evil:
भ्रष्टाचार की लिखी जा रही है एक नई कहानी,
जनता की नहीं सुनी जा रही कोई पुकार,
देश में हो रही है घोटालों की भरमार |

                          

कभी आदर्श, कभी कॉमनवेल्थ, कभी स्पेक्ट्रम घोटाला,
कोयले ने तो देश की साख को ही किया काला,
इन घोटालों को भ्रष्ट राजनीती ने है पाला,
कैग ने उतारा है आँखों से सबकी जाला, 8-O
कैग जैसी संस्थाओं की देश को है दरकार,
देश में हो रही है घोटालों की भरमार |

                

कैसी है ये ईमानदारी ? कैसी है ये लाचारी ? :-|
प्राकृतिक सम्पदा लूटने की बड़ी है मारामारी,
निजी स्वार्थ पड़ रहे हैं राष्ट्रहित पर भारी,
राजनीति और भ्रष्टाचार की हो गई है यारी,
व्यवस्था हो रही है दागदार और बीमार,
देश में हो रही है घोटालों की भरमार |

                         

भ्रष्टाचार का देश में फ़ैल रहा है जाल,
घोटालों से उठ रहे हैं नए नए सवाल,
कुछ लोग हो रहे हैं खूब मालामाल, :-P
जनता हो रही है कंगाल और तंगहाल, :-(
महंगाई की जनता पर है जबरदस्त मार,
देश में हो रही है घोटालों की भरमार |

                        

सुप्रीम कोर्ट जनता के प्रति कर्तव्य निभाए,
सबूतों की सीमा में वह भी बंध जाये,
जन आन्दोलन जनता को जागरूक बनायें,
पर घोटालों का कारोबार रुक न पाये, :-x
जल्द आना चाहिए इस स्थिति में सुधार,
देश में हो रही है घोटालों की भरमार |

              



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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
October 9, 2012

बहुत अच्छी प्रस्तुतिके लिये बधाई ,,,,,,,,,, देश में हो रही है घोटालों की भरमार, जनता हो रही है भ्रष्ट व्यवस्था की शिकार………

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
September 25, 2012

सुप्रीम कोर्ट जनता के प्रति कर्तव्य निभाए, सबूतों की सीमा में वह भी बंध जाये, जन आन्दोलन जनता को जागरूक बनायें, पर घोटालों का कारोबार रुक न पाये, जल्द आना चाहिए इस स्थिति में सुधार, देश में हो रही है घोटालों की भरमार | सुधर जरूर आएगा. आशा दीप बुझने न दीजिये बधाई सुन्दर प्रस्तुति हेतु, आदरणीय पुनीता जी, सादर

alkargupta1 के द्वारा
September 8, 2012

घोटाले पर घोटाले ….यह देश नहीं सुधरेगा …भ्रष्टाचार में लिप्त इस देश की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत कर दी है पुनीता जी उत्कृष्ट काव्याभिव्यक्ति के लिए बधाई

    Punita Jain के द्वारा
    September 8, 2012

    आदरणीय अलका जी, आपकी प्रतिक्रिया हमेशा उत्साह बढ़ाती है | आपको रचना पसन्द आई तो ऐसा लगा मेरा लिखना सार्थक हुआ | आपका हार्दिक धन्यवाद |

Himanshu Nirbhay के द्वारा
September 8, 2012

घोटालों पे ये कविता रुपी ग्रन्थ की रचना के लिए धन्यवाद पुनीता जी,

    Punita Jain के द्वारा
    September 8, 2012

    हिमांशु जी, प्रतिक्रिया के लिए आपका भी हार्दिक आभार |

Ravinder kumar के द्वारा
September 8, 2012

पुनीता जी, सादर नमस्कार. आपकी कविता को पढ़कर यही याद है के, या इलाही रहम कर, कैसा ये दरबार है, कातिलों की फौज है और काला चोर सरदार(मुखिया) है. आपकी इच्छा जरुर पूरी होगी सुधार अवश्य आएगा . शुभकामनाएं, लिखते रहिये. नमस्ते जी.

    Punita Jain के द्वारा
    September 8, 2012

    आदरणीय रविन्दर जी , बहुत सुन्दर बात कही आपने — “या इलाही रहम कर, कैसा ये दरबार है, कातिलों की फौज है और काला चोर सरदार(मुखिया) है.” ….. यह पंक्तियाँ मजेदार हैं, और आपके सुन्दर विचार हैं| सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद |

pitamberthakwani के द्वारा
September 8, 2012

आप सचमुच में कवयित्री हैं

    Punita Jain के द्वारा
    September 8, 2012

    आदरणीय पीताम्बर जी, नमस्कार , आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर बहुत प्रोत्साहन मिला | आपका हार्दिक धन्यवाद |

Lahar के द्वारा
September 7, 2012

बहुत खूब !! पूजीपति चला रहे देश को , छीन रहा गरीब का निवाला ! सड़क से संसद तक , हर तरफ है घोटाला !!! http://lahar.jagranjunction.com

    Punita Jain के द्वारा
    September 8, 2012

    धन्यवाद , लहर जी | सही कहा आपने—सड़क से संसद तक , हर तरफ है घोटाला !!!

Chandan rai के द्वारा
September 7, 2012

punita ji , भ्रष्टाचार का देश में फ़ैल रहा है जाल, घोटालों से उठ रहे हैं नए नए सवाल, कुछ लोग हो रहे हैं खूब मालामाल, :-P जनता हो रही है कंगाल और तंगहाल, :-( महंगाई की जनता पर है जबरदस्त मार, देश में हो रही है घोटालों की भरमार | इस कविता का लिखा जाना आपके द्वारा समाज पर किये एक परोपकार कार्य जैसा ही है ! मेरा अभिनन्दन स्वीकारें

    Punita Jain के द्वारा
    September 7, 2012

    आदरणीय चन्दन जी, आपने समाज पर परोपकार की बात कहकर मेरी कविता को बहुत सम्मान दे दिया , लगा जैसे यह कविता लिखना सफल हुआ | उत्साह बढ़ाने के लिए आपका हार्दिक आभार |

yogi sarswat के द्वारा
September 7, 2012

रष्टाचार का देश में फ़ैल रहा है जाल, घोटालों से उठ रहे हैं नए नए सवाल, कुछ लोग हो रहे हैं खूब मालामाल, :-P जनता हो रही है कंगाल और तंगहाल, :-( महंगाई की जनता पर है जबरदस्त मार, देश में हो रही है घोटालों की भरमार | अब तो ये हाल हो गया है की जैसे जैसे महंगाई बढ़ रही है घोटालों की संख्या और रकम भी बढ़ रही है ! बहुत बढ़िया , आपने काव्य के रूप में इस समस्या को प्रस्तुत किया !

    Punita Jain के द्वारा
    September 7, 2012

    आदरणीय योगी जी, बिल्कुल सही कहा आपने — जैसे जैसे महंगाई बढ़ रही है घोटालों की संख्या और रकम भी बढ़ रही है ! सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद |

dineshaastik के द्वारा
September 7, 2012

पुनीता जी, आश्चर्य है कि इस क्षेत्र में हमारा नाम गिनीज बुक में क्यों नहीं दर्ज होता। सु्न्दर एवं सत्य पर आधारित सराहनीय रचना……

    Punita Jain के द्वारा
    September 7, 2012

    आदरणीय दिनेश जी, शायद गिनीज बुक इस क्षेत्र के रिकॉर्ड नहीं रखती वरना तो पहले ही हमारा नाम दर्ज हो गया होता | वैसे जनता की मेमोरी बुक में तो यह सब दर्ज हो ही गया है ,जब तक वह इसे भूलेगी नहीं | जब तक आपकी प्रतिक्रिया नहीं आती रचना अधूरी लगती है | आपका हार्दिक धन्यवाद |

akraktale के द्वारा
September 6, 2012

पुनीता जी              सादर, सच है घोटालों की भरमार हो गयी है किन्तु जिनको करना है सुधार वे खुद ही इसमें लिप्त हैं तो फिर कैसे सुधार होगा. सुन्दर रचना बधाई.

    Punita Jain के द्वारा
    September 7, 2012

    आदरणीय अशोक जी, यही तो आज सबसे बड़ी समस्या बन गई है,—घर को ही आग लग रही है घर के चिराग से | शायद भविष्य में इस समस्या का कुछ हल निकल पाए और देश का भाग्य चमक जाये | आपका हार्दिक धन्यवाद |

vikramjitsingh के द्वारा
September 6, 2012

जब रोम जल रहा था…..नीरो अपने महल की खिड़की में आराम से बैठा बांसुरी बजा रहा था……उसको रोते-चीखते लोग (प्रजा) बहुत अच्छे लगते थे…..उसने खुद ही रोम में आग लगवाई थी…..ताकि लोगों को रोते-चिल्लाते-चीखते-भागते देख सके…….यही आजकल अपने देश में हो रहा है…..??? सादर….पुनीता जी,,,,,

    Punita Jain के द्वारा
    September 6, 2012

    आदरणीय विक्रमजीत जी, सही कहा आपने, ऐसा हमारे देश में भी हो रहा है | देश घोटालों और जनता महंगाई की आग में जल रही है लेकिन यहाँ Divide and Rule की नीति अपना कर और वोट बैंक की बांसुरी बजा बजाकर सत्ता का आनंद लिया जा रहा है |

nishamittal के द्वारा
September 6, 2012

भ्रष्टाचार का देश में फ़ैल रहा है जाल, घोटालों से उठ रहे हैं नए नए सवाल, कुछ लोग हो रहे हैं खूब मालामाल, जनता हो रही है कंगाल और तंगहाल, महंगाई की जनता पर है जबरदस्त मार, देश में हो रही है घोटालों की भरमार | वाह पुनीता जी घोटाला पुराण में आपने घोटालों और उनके दुष्प्रभावों को समझाया सुन्दर पंक्तियों में

    Punita Jain के द्वारा
    September 6, 2012

    आदरणीय निशा जी, समय समय पर आने वाले घोटाले रूपी भूकम्पों से पूरा देश हिल जाता है | मेरी कलम भी हिल गई और यह कविता बन गई | घोटाला पुराण को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार |

jlsingh के द्वारा
September 6, 2012

घोटालों की वैसे तो है परम्परा पुरानी, अब तो घोटालों ने रिकोर्ड तोड़ने की ठानी, देश के खजाने को हो रही है भारी हानि, अब सरकार ने भी तेल कम्पनियों की सुनी है कहानी! सब्सिडी कहाँ से दें, तुम तेल का दाम बढाओ, हमने तुम्हारी बात मानी जनता होती है परेशान तो होने दो हमें तो अभी कोयले की आड़ में, आरक्षण का खेल खेलने दो! पुनीता जी, हमने आपके सुर में सुर मिलाया है आपकी कविता को थोडा आगे बढाया है!

    Punita Jain के द्वारा
    September 6, 2012

    आदरणीय जवाहर भाईसाहब, वाह – वाह, बहुत खूब, अतिसुन्दर | आपने क्या सुर में सुर मिलाया है, मजा आ गया | आपकी पंक्तियों से तो कविता बिलकुल up to date हो गयी है | मैंने भी चार लाइनें और लिखी हैं – कोयले की आग पे आरक्षण का पानी, जनता तो है बँट जानी, फिर खूब करेंगे मनमानी, यही तो है नीति पुरानी |

drbhupendra के द्वारा
September 5, 2012

अति सुन्दर रचना ,वास्तव में कैग जैसी इमानदार संस्थाए इस देश में अभी बची हुई जिसके कारण घोटालो का पर्दाफाश हो जाता वरना घोटाले हो भी जाते और पता भी न चलता .. आमंत्रित http://drbhupendra.jagranjunction.com/2012/09/05/%e0%a4%90%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%a3/

    Punita Jain के द्वारा
    September 6, 2012

    भूपेन्द्र जी, रचना पसन्द करने लिए हार्दिक धन्यवाद | आपने सही कहा कि CAG के कारण ही ये सब घोटाले सामने आये हैं | CAG की ईमानदारी, देशभक्ति और साहस को salute | मैं आपकी पोस्ट जरूर पढूंगी |


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