Contemporary Thoughts

Contemporary Thoughts

15 Posts

130 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 9922 postid : 59

क्यों होता है आज भी नारी का अपमान ?

  • SocialTwist Tell-a-Friend

स्त्री पुरुष दोनों का है महत्व समान,

क्यों होता है आज भी नारी का अपमान ?

.

जन्म के समय बेटे की चाह करे,

बेटी के जन्म लेने पर आह भरे,

कभी गर्भ में उसके जीवन को हरे,

भेदभाव बेटी के साथ करने से ना डरे,

बेटी के महत्व को भूल जाता है इन्सान,

क्यों होता है आज भी नारी का अपमान ?


युवावस्था में वो बदसलूकी और छेड़छाड़ सहे,

शर्म और इज्जत के कारण कुछ न कहे,

कार्यक्षेत्र में भी असुरक्षा की भावना बहे,

गाँव या शहर, कहीं भी सुरक्षित ना रहे,

कानून व्यवस्था न बचा सके उसका स्वाभिमान,

क्यों होता है आज भी नारी का अपमान ?


शादी के बाद दहेज की बलि चढ़ायें,

घरेलू हिंसा की भी उसे शिकार बनायें,

बन्धन की बेड़ियाँ पैरों में पहनाएं,

मानसिक उत्पीड़न कर उसे सताएं,

इन्सानियत छोड़ कुछ लोग बनते हैं हैवान,

क्यों होता है आज भी नारी का अपमान ?


नवजात बच्चियाँ छोड़ी जाती हैं समझकर भार,

चंद रुपयों में बेची जाती हैं करके तिरस्कार,

छोटी उम्र में ही दुष्कर्म की होती हैं शिकार,

जीवन में सहती रहती हैं अनेकों अत्याचार,

समाज में नारी को मिला न उचित सम्मान,

क्यों होता है आज भी नारी का अपमान ?

..



Tags:       

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

8 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
July 24, 2012

एक अनुत्तरित प्रश्न रखा है आपने समाज के समक्ष ! ज्वलंत मुद्दे पर सुलगती कविता के लिए पुनीता जी ! ……..बधाई !! पुनश्च !!

    Punita Jain के द्वारा
    July 24, 2012

    आदरणीय आचार्य जी, उत्साह बढ़ाती प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद | आपके मार्गदर्शन से ही मैं यह कविता लिख पाई हूँ, आशा करती हूँ की आगे भी आपका आशीर्वाद ऐसे ही मिलता रहेगा |

ajaykr के द्वारा
July 24, 2012

आदरणीय पुनीता जी, भारत एक स्त्री प्रधान देश हैं ….यहाँ प्राचीन काल से घर की बागडोर माँ के हाथ में रही हैं,स्त्रियो के साथ अत्याचार के लिए स्त्री जाति का भी बड़ा योगदान हैं ,और आयातित पाश्चात्य संस्कृति का भी ……….आपको मेरे ब्लॉग पर आमंत्रण हैं |

    Punita Jain के द्वारा
    July 24, 2012

    आदरणीय अजय जी, इन समस्याओं के लिए हमारा समाज और उसकी रुढ़िवादी परम्पराएँ ही सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं |

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 19, 2012

आदरणीय पुनीता जी …. सादर अभिवादन ! आपकी इस क्यों ? का जवाब तो पूरे विश्व के बुद्धिजीवी मिल कर भी शायद नहीं दे सकते है ….. दुःख इसी बात है की यह क्यों दिनोदिन और भी बड़ी होती चली जा रही है ….. इस पर अंकुश गर नहीं लग पाए तो कम से कम कमी तो आ ही जाए इसी कामना के साथ बेहतरीन कविता पर मुबारकबाद :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-? :-x :-) :-? :-x :-) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-P :-? :-x :-) :evil: ;-) :-D :-o :-( :-D :evil: ;-) :-D :mrgreen: :-? :-x :-) : :roll: :oops: :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) जय श्री कृष्ण जी+ जय हो मुनिश्री तरुण सागर जी

    Punita Jain के द्वारा
    July 20, 2012

    आदरणीय राजकमल जी, आपने बिलकुल सही कहा, यह समस्या अगर पूरी तरह ख़त्म नहीं हो रही है, तो कम से कम कुछ कमी तो आनी ही चाहिए | अच्छे विचारों और समर्थन देती सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद | आपके smilies बहुत अच्छे लगते हैं | जय श्री कृष्ण जी+ जय हो मुनिश्री तरुण सागर जी

allrounder के द्वारा
July 19, 2012

नमस्कार पुनीतजी, नारी के संपूर्ण जीवन मैं जो बाधाएं आती हैं उसका पूर्णता बखान कर रही है आपकी रचना ! हार्दिक बधाई ! और मन से ये कामना की आने वाले समय मैं स्तिथियाँ बदले लड़कियों के लिए !

    Punita Jain के द्वारा
    July 19, 2012

    आदरणीय सचिन जी, आपकी सुन्दर सोच और सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार |

Chandan rai के द्वारा
July 19, 2012

पुनीता जी , आप अपने आज ली सामाजिक परिश्थिति से पीड़ित महिला के मनोभाव का अत्यंत ह्रदय विदारक चित्रण किया है , नवजात बच्चियाँ छोड़ी जाती हैं समझकर भार, चंद रुपयों में बेची जाती हैं करके तिरस्कार, छोटी उम्र में ही दुष्कर्म की होती हैं शिकार, जीवन में सहती रहती हैं अनेकों अत्याचार, समाज में नारी को मिला न उचित सम्मान, क्यों होता है आज भी नारी का अपमान ? ..

    Punita Jain के द्वारा
    July 19, 2012

    आदरणीय चन्दन जी, प्रतिक्रिया और उत्साह वर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद |

Mohinder Kumar के द्वारा
July 19, 2012

पुनीता जी, नमस्कार, बहुत से जटिल और सार्थक प्रश्न आपने अपनी रचना के माध्यम से उठाये हैं और इन सब का सवाल हम सब को ही मिल कर खोजना है. लिखते रहिये.

    Punita Jain के द्वारा
    July 19, 2012

    आदरणीय मोहिन्दर जी, प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार | आप सही कह रहे है—इन समस्याओं का समाधान हम सबको ही खोजना होगा तभी शायद समाज में कोई सार्थक बदलाव आ पाए |

shashibhushan1959 के द्वारा
July 19, 2012

आदरणीय पुनीता जी, सादर ! बहुत सुन्दर रचना ! मन को झकझोरते हुए प्रश्न ! “”स्त्री पुरुष दोनों का है महत्व समान, क्यों होता है आज भी नारी का अपमान ?”"” यद्यपि की परिस्थितियाँ बदल रही हैं, पर इस बदलाव का जो सार्थक और सही रूप होना चाहिए था, वह न होकर एक अलग दिशा में ही बढ़ता जा रहा है ! फिर भी आशावान रहना चाहिए !

    Punita Jain के द्वारा
    July 19, 2012

    आदरणीय शशिभूषण जी, आपने बिल्कुल सही कहा –परिस्थितियाँ बदल रही है ,पर बदलाव सही और सार्थक नही हो पा रहा है | उत्साह वर्धन करती सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद |

akraktale के द्वारा
July 19, 2012

पुनीता जी सादर नमस्कार, जन्म के समय बेटे की चाह करे, बेटी के जन्म लेने पर आह भरे, कभी गर्भ में उसके जीवन को हरे, भेदभाव बेटी के साथ करने से ना डरे, बेटी के महत्व को भूल जाता है इन्सान, क्यों होता है आज भी नारी का अपमान ? मनोभावों को बहुत सुन्दरता से आपने शब्दों में उतारा है. आप ही नहीं समाज का हर सभ्य नागरिक आज इसे लेकर चिंतित है. बधाई.

    Punita Jain के द्वारा
    July 19, 2012

    आदरणीय अशोक जी, उत्साह बढ़ाती प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार |

yamunapathak के द्वारा
July 18, 2012

पुनीता जी,बहुत ही विचारणीय कविता है.

    Punita Jain के द्वारा
    July 18, 2012

    यमुना जी, उत्साह बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद |

punitasingh के द्वारा
July 18, 2012

पुनीता जी नारी की समस्या है उसकी ममता और भावुकता |समाज में इन्ही गुणों से उसको भरमाया गया |

    Punita Jain के द्वारा
    July 18, 2012

    पुनीता जी, आप सही कह रही हैं पर क्या करें ममता और भावुकता से नारी का ऐसा अटूट रिश्ता है कि ये उसकी पहचान ही बन गए हैं |

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 18, 2012

करता जो नारी का अपमान मानव नही उसे पशु जान बधाई. 

    Punita Jain के द्वारा
    July 18, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी, आपने थोड़े शब्दों में ही बहुत सुन्दर और सही बात कह दी | –पता चला था कि आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा,जानकर चिन्ता हुई | अभी आपका स्वास्थ्य कैसा है ?

    jlsingh के द्वारा
    July 19, 2012

    कुशवाह जी की भवन से सौ प्रतिशत सहमत!

    jlsingh के द्वारा
    July 19, 2012

    कृपया भवन को भावना पढ़ें! आभार सहित!

    Punita Jain के द्वारा
    July 19, 2012

    आदरणीय जवाहर भाई जी, सुन्दर विचार और प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद |

Ravinder kumar के द्वारा
July 18, 2012

पुनीता जी, सादर नमस्कार. नारी की वर्तमान स्तिथि पर सवाल उठाती भावपूर्ण रचना के लिए पुनीता जी बधाई. नारी का अपमान केवल आधी आबादी का अपमान नहीं अपितु उस सृष्टिकर्ता का अपमान है. लेकिन जिस समाज के संस्कार कुंठित हो चुकें हों उनसे और क्या अपेक्षा की जा सकती है. लोगों की संकीर्ण मानसिकता और सामाजिक सोच पर विचारणीय सवाल उठती बेहतरीन कविता के आप को बधाई और भविष्य के शुभकामनाएं. नमस्ते जी.

    Punita Jain के द्वारा
    July 18, 2012

    आदरणीय रविन्दर जी, आपके सुन्दर विचार और उत्साह वर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से आभार |

yogi sarswat के द्वारा
July 18, 2012

आदरणीय पुनीता जी , बहुत वीभत्स चेहरा है इस समाज का ! na जाने कसी लोग अपने ही खून को इस दुनिया में आने से पहले ही मार डालते हैं ? शायद समाज की उदासीनता और समाज में ही सम्मिलित भेडियों का डर इस बात के लिए जिम्मेदार तो नहीं ? बहुत सुन्दर और भावुक रचना

    Punita Jain के द्वारा
    July 18, 2012

    आदरणीय योगी जी, आपने बिल्कुल सही कहा -समाज की उदासीनता, समाज में ही सम्मिलित भेडियों का डर और साथ ही दहेज प्रथा हमारे देश में हो रही भ्रूण हत्याओं के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं |

alkargupta1 के द्वारा
July 18, 2012

पुनीता जी , लोगों की संकीर्ण मानसिकता और सामाजिक सोच पर विचारणीय काव्याभिव्यक्ति के लिए बधाई

    Punita Jain के द्वारा
    July 18, 2012

    अलका जी, सुन्दर प्रतिक्रिया और समर्थन के लिए ह्रदय से आभार |

nishamittal के द्वारा
July 18, 2012

समाज की खोखली मान्यताओं और सोच पर प्रहार करती विचारणीय रचना पुनीता जी.,

    Punita Jain के द्वारा
    July 18, 2012

    आदरणीय निशा जी, उत्साह बढ़ाती प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद |

rajuahuja के द्वारा
July 18, 2012

माननीया पुनीता जी ! सच तो यह है की इस पूरी समस्या की जड़ स्वयं नारी ही है ! बाल्यावस्था में बच्चे को प्रारंभिक संस्कार माँ से ही मिलते हैं माँ से अच्छा गुरु कोई हो ही नहीं सकता ! अच्छे-बुरे का भेद यदि संस्कारों में मिले तो किसी हद तक समस्या का निदान स्वतः संभव है ! सास-बहू के द्वन्द / ननद-देवरानी की नोक-झोंक /मन-मुटाव ,कलह ये घर-घर की कहानी है ! और इसका प्रभाव बच्चों पर पड़ना निश्चित है ! बच्चे वही सीखते है जो उनके आस-पास घटित होता है ! और दहेज़ की लालसा भी सबसे ज्यादा सास को ही होती है यदि सास चाहे तो इस समस्या का निदान संभव है ! शेष समस्याएं इतनी विकराल नहीं है! उनका समाधान संभव है ! अतः इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं की नारी ही नारी की सबसे बड़ी शत्रु है !

    Punita Jain के द्वारा
    July 18, 2012

    मै आपकी बात से सहमत हूँ | भूर्ण -हत्या, दहेज, मानसिक उत्पीइन, अच्छे संस्कारों की कमी आदि अनेक समस्याओं के लिए नारी भी बराबर की जिम्मेदार है |

dineshaastik के द्वारा
July 18, 2012

आदरणीय पुनीता जी हकीकत को बयां करती एवं समाज पर तीखा प्रहार करती काव्यात्मक प्रस्तुति के लिये बधाई…….

    Punita Jain के द्वारा
    July 18, 2012

    आदरणीय दिनेश जी, उत्साह बढ़ाती प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार |


topic of the week



latest from jagran