Contemporary Thoughts

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मानसून अब आ भी जाओ

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इतना मत इन्तजार कराओ,

मानसून अब आ भी जाओ ।

.

पानी की फुहारें ले आओ,

प्यासी धरती की प्यास बुझाओ,

किसानों की उम्मीद जगाओ,

बारिश का मौसम बनाओ,

ठंडी – ठंडी हवा चलाओ,

मानसून अब आ भी जाओ ।

.

पूर्वोत्तर में तुम बरस गए हो,

पर वहाँ पर क्यों अटक गए हो,

क्या तुम रास्ता भटक गए हो ?

जो पहाड़ों में लटक गए हो,

गर्मी से हमें राहत दिलाओ,

मानसून अब आ भी जाओ ।

.

सूख रही हैं नदियाँ सारीं,

पानी की है मारा मारी,

गर्मी पड़ रही है सब पर भारी,

चिड़ियों की बंद है किलकारी,

थोड़ी सी तो दया दिखाओ,

मानसून अब आ भी जाओ ।

.

पेड़ों की हरियाली सूख गई,

घास भी हँसना भूल गई,

प्रकृति भी हमसे रूठ गई,

इन्तजार की घड़ियाँ छूट गईं,

सबको मत इतना तरसाओ,

मानसून अब आ भी जाओ ।

.



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31 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

narayani के द्वारा
July 17, 2012

बहुत सुंदर पुकार,मनुहार मानसून क़ी.. मान…सुन ……मानसून .वाह सुंदर रचना धन्यवाद नारायणी

    Punita Jain के द्वारा
    July 17, 2012

    नारायणी जी, सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार |

Chandan rai के द्वारा
July 9, 2012

पुनीता जी , आपकी इस सुन्दर कविता की पुकार सुन मानसून का दिल भी पसीज गया , और खूब बरसा देखीय हमारे उत्तर भारत में ! सूख रही हैं नदियाँ सारीं, पानी की है मारा मारी, गर्मी पड़ रही है सब पर भारी, चिड़ियों की बंद है किलकारी, थोड़ी सी तो दया दिखाओ, मानसून अब आ भी जाओ । बेहतरीन रचना !

    Punita Jain के द्वारा
    July 10, 2012

    आदरणीय चन्दन जी , प्रतिक्रिया और उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार |

nishamittal के द्वारा
July 7, 2012

पुनीता जी अनुपस्थिति के कारण मैंने आपकी सुन्दर पुकार तब देखी जब मानसून आ गया आपकी पुकार सुनकर

    Punita Jain के द्वारा
    July 7, 2012

    आदरणीय निशा जी, प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद, मानसून के आने से गर्मी से थोड़ी राहत मिली | बस अब यह आशा है कि मानसून सामान्य बना रहे |

Mohinder Kumar के द्वारा
July 6, 2012

पुनीता जी, जो प्रार्थना आप अपनी रचना में कर रही हैं वही इस समय उत्तर और मध्य भारत वर्ष के सभी प्राणी कर रहे हैं. भीष्ण गर्मी से हाहाकार मचा हुआ है और किसानों की आशायें आने वाले बारिश पर टिकी हैं… ईश्वर प्रार्थना स्वीकार करें…भाव भरी रचना के लिये बधाई.

    Punita Jain के द्वारा
    July 6, 2012

    आदरणीय मोहिन्दर जी, हमारे देश के अन्नदाता (Kisan) और हम सभी की प्रार्थनाएं अब स्वीकार हो रहीं हैं | मानसून पूरे उत्तर भारत में सक्रिय हो गया है और आज शाम दिल्ली में भी पहुँच गया है |

sinsera के द्वारा
July 5, 2012

पुनीता जी, नमस्कार… ये पीले पीले ख़ूबसूरत से ट्यूलिप्स आप के ब्लॉग तक खींच लाये और एक प्यारी सी कविता भी मिल गयी..जैसे हम बचपन में कहते थे……… काले मेघा पानी दे…पानी दे गुड़धानी दे…..

    Punita Jain के द्वारा
    July 5, 2012

    आदरणीय सरिता जी, काले मेघा पानी दे…पानी दे गुड़धानी दे….. आपने तो बचपन की यादें ताज़ा कर दीं | मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है, प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार |

ajaykr के द्वारा
July 3, 2012

पुनीता जी , मानसून को तो आना ही हैं ……..क्यूंकि आपने इतने प्रेम से बुलाया हैं ………………………………. मुझे अपने प्रिय कवि रामवृक्ष सिंह जी की एक कविता याद आ रही हैं ……………………………. घिर गई है पास शम ए दिल के आकर फिर उदासी आज बरसेगी घटा फिर औ रहेगी रूह प्यासी मिलन में उन्मत्त हो सीत्कार करती हैं बदलियाँ नारिकेलों को पवन के स्पर्श से है बदहवासी काँपते पीपल के पत्तों में सिहरता आर्द्र कागा बाज के भय से अभय पा गौर ने संकोच त्यागा झूमते बाँसों के झुरमुट लरजतीं तन्वी लताएं दादुरों में मेघ की आश्वस्ति से कंदर्प जागा चाँद की अभिलाष में नतशिर रहेगी आज नलिनी केलियों में कैद भँवरे को रखेगी फिर कमलिनी मेरे भीतर मेरे बाहर व्याप जाएगी दिशा सी वह तुम्हारी साँस दोलित उष्ण फागुन की हवासी चाँप देंगे चेतना को सर्द पवनों के थपेड़े घेर लेंगे आर्द्र पर्वत को कहीं बादल घनेरे स्वेद भीगे मुख अजानी रात जैसे मुस्कुराती वर्जती तम के प्रणय को तुम रहोगी दीपिका सी l

yogi sarswat के द्वारा
June 30, 2012

सूख रही हैं नदियाँ सारीं, पानी की है मारा मारी, गर्मी पड़ रही है सब पर भारी, चिड़ियों की बंद है किलकारी, थोड़ी सी तो दया दिखाओ, मानसून अब आ भी जाओ सुन्दर प्रार्थना ! इस प्रार्थना में , मैं भी आपके साथ हाथ जोड़कर खड़ा हूँ !

    Punita Jain के द्वारा
    July 4, 2012

    सबकी प्रार्थनाएं रंग ला रही हैं, आशा है आने वाले दिनों में मानसून बारिश की कमी को पूरा कर देगा |

akraktale के द्वारा
June 29, 2012

पुनीता जी सादर नमस्कार, इतना मत इन्तजार कराओ, मानसून अब आ भी जाओ । बिलकुल सही लिखा है आपने हम मानसून के आने के लिए सिर्फ और सिर्फ इन्तजार ही कर रहे हैं. सुन्दर रचना बधाई.

    Punita Jain के द्वारा
    July 4, 2012

    आदरणीय अशोक जी, मानसून का इंतज़ार अब ख़त्म होने वाला है, उसके आगमन की सूचक पूर्वा ठंडी हवाएं चल पड़ी हैं |

rajuahuja के द्वारा
June 29, 2012

दादी बोलीं ! हम तो सावन बोलें भैया, तुम बोलत हौ मानसून ! अब ई का बरसे बेचारा, जब गगरी होई गई सून, वाह रे मानसून ! सावन में बदरा बरसेंगे, दादुरा आँगन में कूदेंगे , अमरौटी में कोयल बोली बदरी भर लाई है झोली ! लो चली , पवन संग बूंदें, अंतस को छूने ! पुनीता जी ,वर्षा का आनंद ही निराला है ! मन-मयूर झूम उठता है, सुन्दर मौजूं रचना ,साधुवाद !

    Punita Jain के द्वारा
    July 4, 2012

    दादी बोलीं ! हम तो सावन बोलें भैया, तुम बोलत हौ मानसून ! अब ई का बरसे बेचारा, जब गगरी होई गई सून, वाह रे मानसून ! ——– दादी की बात बहुत प्यारी लगी । धन्यवाद ।

allrounder के द्वारा
June 28, 2012

नमस्कार पुनीता जी, सच मानसून न जाने कहाँ रुक कर रह गया है जिससे जीवन हलकान हो रहा है ! शायद आपका आह्व्हन मानसून सुन ले और झूम के बरसे ! मानसून और आपके लेखन के लिए हार्दिक शुभकामनायें !

    Punita Jain के द्वारा
    July 4, 2012

    आपकी शुभकामनाओं के लिए हार्दिक आभार |

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 28, 2012

पुनीता जी बहुत सुन्दर …भटकाव नहीं होगा अब ..चल पड़े हैं मेघदूत ..अब सुनेंगे आप सब के मन की पीर ….प्रकृति खिलखिलाएगी लहराएगी ..मोर नाच उठेंगे दादुर पपीहा पपीहा बोल….आनंद ही आनंद जय श्री राधे … प्यारी रचना गर्मी से आकुल हर मन ….. चिड़ियों की बंद है किलकारी, थोड़ी सी तो दया दिखाओ, मानसून अब आ भी जाओ । . पेड़ों की हरियाली सूख गई, घास भी हँसना भूल गई, प्रकृति भी हमसे रूठ गई, भ्रमर ५

    Punita Jain के द्वारा
    July 4, 2012

    चल पड़े हैं मेघदूत………….. अब तो बस उनके सब जगह पहुँच कर बरसने का इंतज़ार है |

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 28, 2012

आपने प्रेम से बुलाया है तो जरूर बरसेगा

    Punita Jain के द्वारा
    July 4, 2012

    भगवान करे ऐसा ही हो |

jlsingh के द्वारा
June 28, 2012

पुनीता जी, मॉनसून इस साल विलंब कर रहा है पर अब और ज्यादा देर नहीं होना चाहिए. नेपाल में वारिश से बिहार की नदियों का जल स्तर काफी बढ़ गया है. देखें, आपकी विनती अवश्य अपना प्रभाव दिखायेगी .

    Punita Jain के द्वारा
    July 4, 2012

    आदरणीय जवाहर भाई जी, मानसून ने भले ही देर से पर शायद विनती स्वीकार कर ली है । अब शायद मानसून अपनी जगह से आगे बढ़ जाए और बिहार में बाढ़ का खतरा कुछ कम हो जाए ।

dineshaastik के द्वारा
June 28, 2012

ग्रीष्म से पीड़ित जन मानस की मेघ के आवाहन को काव्य रूप में  प्रस्तुति के लिये बधाई……

    Punita Jain के द्वारा
    July 4, 2012

    आदरणीय दिनेश जी, बहुत बहुत आभार ।

pritish1 के द्वारा
June 27, 2012

मित्रवर………..सप्रेम मानसून तो हमसे रूठी हुई है………..कदाचित आपका आलेख उसे मन पाए……….सुन्दर लेखन मेरी कहानी ऐसी ये कैसी तमन्ना है……..अवश्य पढें……..मैंने इसके तिन भाग प्रकाशित किये हैं……

    Punita Jain के द्वारा
    July 4, 2012

    धन्यवाद प्रितीश जी


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