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पिता का वर्णन कैसे करूँ –(Father’s Day : 17-06-2012)

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समुद्र में पानी का जहाज है पिता,

रेगिस्तान में झील और तालाब है पिता |

अपने बच्चों का पालनहारा है पिता,

परिवार रुपी नाव का खेवनहारा है पिता |

.

भयंकर गर्मी में वृक्ष की ठंडी छाया है पिता,

कड़कती ठंड में सुनहरी धूप की माया है पिता |

तेज बरसात में छतरी जैसा सहारा है पिता,

बसन्त ऋतु में खिलते फूलों जैसा नज़ारा है पिता |

.

संस्कारों की पाठशाला है पिता,

आदतों, गुणों की कार्यशाला है पिता |

सुरक्षा देने वाला किला है पिता,

मुश्किल में काम आने वाला हौसला है पिता |

.

जिन्दगी की कठिन राह में साथ चलता साया है पिता,

जीवन के हर क्षण में समाया है पिता |

पिता का वर्णन करने बैठो तो शब्द कम पड़ जाते हैं,

पिता की महानता के आगे मस्तक स्वयं झुक जाते हैं |

.

–Dedicated to my respected father on Father’s Day.

.



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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
November 20, 2012

वाह बहुत खूबसूरत अहसास हर लफ्ज़ में आपने भावों की बहुत गहरी अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया है… बधाई आपको… सादर वन्दे…

    Punita Jain के द्वारा
    November 20, 2012

    आदरणीय मदन मोहन जी, उत्साह बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद |

aman kumar के द्वारा
October 11, 2012

भयंकर गर्मी में वृक्ष की ठंडी छाया है पिता, कड़कती ठंड में सुनहरी धूप की माया है पिता | तेज बरसात में छतरी जैसा सहारा है पिता, बसन्त ऋतु में खिलते फूलों जैसा नज़ारा है पिता | .सच कहा आपने !!बहुत सुंदर !

    Punita Jain के द्वारा
    November 20, 2012

    अमन जी, बहुत बहुत धन्यवाद |

pitamberthakwani के द्वारा
September 8, 2012

पुनीता जी, आपकी कविता से मुझे अछा लगा

    Punita Jain के द्वारा
    September 9, 2012

    आदरणीय पीताम्बर जी, आपको कविता अच्छी लगी, यह जानकर ख़ुशी हुई | आपका हार्दिक धन्यवाद |

Himanshu Nirbhay के द्वारा
September 2, 2012

आपके होने का अहसास है पिता, सदा आपके ही पास है पिता, वेबजह आ भी जाएँ मुश्किलें तो क्या अन्धकार मैं प्रकाश की आस ही पिता… अति सुन्दर वर्णन पुनीता जी…..

    Punita Jain के द्वारा
    September 4, 2012

    हिमांशु जी , बहुत बहुत धन्यवाद |

yogi sarswat के द्वारा
July 18, 2012

संस्कारों की पाठशाला है पिता, आदतों, गुणों की कार्यशाला है पिता | सुरक्षा देने वाला किला है पिता, मुश्किल में काम आने वाला हौसला है पिता | .पिता को समर्पित सुन्दर रचना है आपकी !

    Punita Jain के द्वारा
    July 20, 2012

    आदरणीय योगी जी, उत्साह बढ़ाती सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद |

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 23, 2012

प्यारी रचना … संस्कारों की पाठशाला है पिता, आदतों, गुणों की कार्यशाला है पिता | सुरक्षा देने वाला किला है पिता, मुश्किल में काम आने वाला हौसला है पिता | पुनीता जी सच में पिता माँ तो नहीं हो सकता लेकिन हमारे सारे जीवन को एक सुन्दर आकर और ढाँचे में ढाल देने वाला त्यागी बलिदानी पूजनीय है पिता …उपर्युक्त पंक्तियाँ बहुत सुन्दर बधाई हो भ्रमर ५

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 23, 2012

संस्कारों की पाठशाला है पिता, आदतों, गुणों की कार्यशाला है पिता | सुरक्षा देने वाला किला है पिता, मुश्किल में काम आने वाला हौसला है पिता | पुनीता जी सच में पिता माँ तो नहीं हो सकता लेकिन हमारे सारे जीवन को एक सुन्दर आकर और ढाँचे में ढाल देने वाला त्यागी बलिदानी पूजनीय है पिता …उपर्युक्त पंक्तियाँ बहुत सुन्दर बधाई हो भ्रमर ५

Punita Jain के द्वारा
June 20, 2012

आप सभी ने इतनी अच्छी प्रतिक्रियाएं दीं, लगा जैसे कि कविता लिखने का इनाम ही मिल गया | इसके लिए आप सभी को हार्दिक धन्यवाद |

Madhur Bhardwaj के द्वारा
June 18, 2012

पुनीता जी सादर, पिता के लिए बहुत ही उत्तम रचना है, सत्य ही लिखा है आपने पिता का वर्णन कैसे करू! यक़ीनन ये असंभव है! संस्कारों की पाठशाला है पिता, आदतों, गुणों की कार्यशाला है पिता | सुरक्षा देने वाला किला है पिता, मुश्किल में काम आने वाला हौसला है पिता | http://madhurbhardwaj.jagranjunction.com

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 17, 2012

किसी भी शब्दों के वर्णन से कहीं उपर है मेरे पिता स्वयं ही झुक जाता है चरणों में मस्तक इतने महान है मेरे पिता http://krishnabhardwaj.jagranjunction.com/2012/06/17/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE/

akraktale के द्वारा
June 16, 2012

पुनीता जी सादर, पिता के प्रति मनोभाव को व्यक्त करती सुन्दर रचना बधाई. संस्कारों की पाठशाला है पिता, आदतों, गुणों की कार्यशाला है पिता | सुरक्षा देने वाला किला है पिता, मुश्किल में काम आने वाला हौसला है पिता |

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 16, 2012

आदरणीय पुनीत जी , सादर बिलकुल सत्य है माता पिता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. बधाई.

चन्दन राय के द्वारा
June 16, 2012

पुनीता जी , संभवत माता पिता पर आकर हर कलम ये मह्सुश करती है की इनके लिए कहा हर शब्द छोटा होगा , संस्कारों की पाठशाला है पिता, आदतों, गुणों की कार्यशाला है पिता | सुरक्षा देने वाला किला है पिता, मुश्किल में काम आने वाला हौसला है पिता | बहुत सुन्दर आपकी कविता , जो कहूंगा कम होगा भगवान् आपके पिता को दीर्घायु बनाये

jlsingh के द्वारा
June 16, 2012

पुनीता जी, नमस्कार ! बिलकुल सही कहा है, आपने पिता जी के गुणों का वर्णन शब्दों में असम्भव है . यहाँ महसूस करने वाली बात है. आपका आभार प्रगटीकरण बहुत ही बेहतरीन है!

nishamittal के द्वारा
June 16, 2012

पिता के प्रति आपकी सुन्दर भावनाएं रचना के माध्यम से अभिव्यक्त हुई पुनीता जी अच्छा लगा.

vikramjitsingh के द्वारा
June 16, 2012

जिस ने अपने माता-पिता का सम्मान किया……. भगवान् उससे कभी दूर नहीं गया….. सादर…..पुनीता जी….

dineshaastik के द्वारा
June 16, 2012

पुनीता जी बहुत सुन्दर एवं विस्तृत  विश्लेषण। पिता को ईश्वर बनाने का सफल  प्रयास। पिता का सांसारीकरण, प्रत्येक  पंक्ति महत्वपूर्ण….


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